
सेवा परियोजना · मध्य प्रदेश
नारायण सेवा
भूखे को आदर के साथ भोजन — इस भाव से कि हम हर व्यक्ति में बसे नारायण की सेवा कर रहे हैं।
परिचय
नारायण सेवा क्या है?
नारायण सेवा का अर्थ है भूखे व्यक्ति को आदर और विनम्रता के साथ भोजन कराना, इस भाव से कि भोजन ग्रहण करने वाले में स्वयं नारायण (ईश्वर) विराजमान हैं। भगवान श्री सत्य साई बाबा ने इसे "ग़रीबों को खाना खिलाना" कहने से मना किया; उनके अनुसार यह दान नहीं, ईश्वर के प्रति कृतज्ञता है।
समितियों में भोजन प्रेम और भक्ति के साथ तैयार किया जाता है, पैक किया जाता है और परोसा जाता है। मध्य प्रदेश में राज्य के अभिलेखों में यह सेवा "नारायण सेवा (पका भोजन)" के नाम से दर्ज होती है, और यह राज्य की सबसे अधिक बार की जाने वाली सेवा गतिविधि है।
“It is quality that God values, not quantity. You may perform narayana seva (feeding the poor) on a large scale, but without purity of heart, you cannot please God. God will be pleased even with a morsel of food offered with sacred feelings. All that you do with purity of heart will find fulfillment.”भावानुवाद (साइट द्वारा): ईश्वर गुणवत्ता देखते हैं, मात्रा नहीं। पवित्र भाव से अर्पित एक कौर भोजन से भी वे प्रसन्न होते हैं; शुद्ध हृदय से किया गया हर कार्य सार्थक होता है।
मध्य प्रदेश में
अभिलेखों में दर्ज सेवा
ये आँकड़े राज्य कार्यालय की स्वीकृत (approved) गतिविधि-रिपोर्टों से सीधे लिए गए हैं। जहाँ कुछ दर्ज नहीं है, वहाँ — दिखाया गया है।
481
बार सेवा, 2026 (अब तक)
2025: 517
1,03,810
लाभार्थी, 2026 (अब तक)
2025: 93,778
6,259
सेवा में भागीदार, 2026 (अब तक)
2025: 7,009
ज़िलेवार आँकड़े हर गतिविधि के लिए अलग से उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए यहाँ केवल राज्य-स्तरीय योग दिखाया गया है।
स्रोत: राज्य कार्यालय की स्वीकृत गतिविधि-रिपोर्टें। 2026: 1 जन॰ 2026 – 27 सित॰ 2026; 2025: 1 जन॰ 2025 – 31 दिस॰ 2025। — = दर्ज नहीं। कोई अनुमान नहीं।
अनुभव
सेवा की कहानियाँ
कहानियाँ सहमति के साथ संकलित की जा रही हैं
हम लाभार्थियों और सेवादलों के अनुभव तभी प्रकाशित करेंगे जब उनकी लिखित सहमति दर्ज हो जाएगी। तब तक यहाँ कोई कहानी नहीं गढ़ी जाएगी।
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