मुख्य सामग्री पर जाएँ
श्री सत्य साई सेवा संगठनमध्य प्रदेश
चमेली की मालाओं के बीच जलता स्वर्ण कमल दीप

संगठन · साधना

नौ सूत्रीय आचार संहिता

संगठन का प्रत्येक सदस्य साधना को दैनिक जीवन का अंग बनाता है और भगवान श्री सत्य साई बाबा द्वारा निर्धारित इन नौ सूत्रों का पालन करता है।

उत्तर पहले

आचार संहिता क्या है?

नौ सूत्रीय आचार संहिता वह दैनिक अनुशासन है जिसे भगवान श्री सत्य साई बाबा ने आध्यात्मिक उन्नति के लिए निर्धारित किया। सदस्यता की एक शर्त इसका पालन करने की तत्परता है। ये सूत्र किसी नए पंथ के नियम नहीं हैं — इनसे हर व्यक्ति अपनी ही आस्था का बेहतर अनुयायी बनता है।

  1. सूत्र १

    प्रतिदिन ध्यान और प्रार्थना।

    मन को शांत करना पहली साधना है। केवल शांत करना पर्याप्त नहीं, मन को निर्मल भी बनाना है। प्रार्थना उसी रूप में करें जो आपकी अपनी परंपरा में सहज हो।

  2. सूत्र २

    सप्ताह में एक बार परिवार के सदस्यों के साथ भक्ति-गायन / प्रार्थना।

    जो परिवार साथ प्रार्थना करता है, वह साथ रहता है। अपनी पारंपरिक उपासना-पद्धति से आरंभ करें, जो सदस्य इच्छुक हों उनके साथ; आपका बदला हुआ आचरण बाकी सबको स्वयं जोड़ लेगा।

  3. सूत्र ३

    संगठन द्वारा बच्चों के लिए संचालित बाल विकास कार्यक्रमों में सहभागिता।

    बाल विकास कक्षाओं में बच्चे अपने धर्म को, दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान को, मानवीय मूल्यों को और स्वामी के जीवन-संदेश को सीखते हैं। ये कक्षाएँ प्रशिक्षित गुरु ही लेते हैं।

  4. सूत्र ४

    संगठन द्वारा आयोजित सामूहिक भक्ति कार्यक्रमों में महीने में कम से कम एक बार उपस्थिति।

    सामूहिक भजन मन को शांत और हृदय को कोमल बनाते हैं। महीने में एक बार न्यूनतम है; भजनों और उनके अर्थ से नियमित जुड़े रहना ही असली उद्देश्य है।

  5. सूत्र ५

    संगठन की सामुदायिक सेवा तथा अन्य कार्यक्रमों में सहभागिता।

    मनुष्य की सेवा को ईश्वर की सेवा मानकर करना — यही इस संगठन का प्राण है। रोगी, निर्धन और ज़रूरतमंद की सेवा स्वयं के रूपांतरण की साधना है।

  6. सूत्र ६

    साई साहित्य का नियमित अध्ययन।

    स्वामी के जीवन और उपदेशों के साथ अन्य धर्मों और संतों के साहित्य का भी अध्ययन करें; अध्ययन-मंडल इसमें सहायक हैं। कितना पढ़ा, इससे अधिक महत्त्वपूर्ण है कि कितना जिया।

  7. सूत्र ७

    जिनके भी संपर्क में आएँ, उन सभी से मृदुता और प्रेम से बोलना।

    कठोर शब्दों का घाव देर तक रहता है। हर किसी की इच्छा पूरी करना सदा संभव न हो, पर विनम्रता से बोलना सदा संभव है।

  8. सूत्र ८

    दूसरों की निंदा में न पड़ना, विशेषकर उनकी अनुपस्थिति में।

    पीठ-पीछे की बात, चरित्र-हनन और असत्य किसी भी आध्यात्मिक समूह को भीतर से खोखला करते हैं। वाणी का उद्देश्य दूसरों को उठाना है, गिराना नहीं।

  9. सूत्र ९

    नारायण सेवा — ज़रूरतमंदों को भोजन कराने के लिए प्रतिदिन कुछ अनाज अलग रखना, भोजन व्यर्थ न करने की आदत डालना और “इच्छाओं पर अंकुश” (सीलिंग ऑन डिज़ायर्स) के सिद्धांतों को व्यवहार में लाना।

    भोजन, ऊर्जा, समय और धन — चारों पर अंकुश रखें, और जो बचे उसे सेवा में लगाएँ। क्रोध और व्यर्थ बातों में भी ऊर्जा ही नष्ट होती है।

आधिकारिक पाठ: ssssoindia.org/code-of-conduct (अंग्रेज़ी मूल; हिंदी अनुवाद इस वेबसाइट का)। व्याख्याएँ ssssoka.org से रूपांतरित।

अपने निकट की समिति में आइए

साप्ताहिक भजन, अध्ययन-मंडल और सेवा — आचार संहिता का अभ्यास समिति के साथ सहज हो जाता है।