
महिला विभाग · 1969 से
महिला विभाग
महिला विभाग संगठन के हर विभाग में महिलाओं की अगुवाई सुनिश्चित करता है: भजन से बाल विकास तक, और नारायण सेवा से मातृ-शिशु देखभाल तक।
महिला विभाग क्या करता है?
महिला विभाग के गठन का निर्णय 20–22 नवंबर 1969 को प्रशांति निलयम में हुए पदाधिकारियों के तीसरे अखिल भारतीय सम्मेलन में लिया गया था। उसी सम्मेलन में बाल विहार (आज का बाल विकास) शुरू करने का निर्णय भी हुआ।
मध्य प्रदेश में आध्यात्मिक, शिक्षा, सेवा और युवा, हर विभाग के लिए राज्य, ज़िला और समिति स्तर पर महिला समन्वयक नियुक्त की जाती हैं। हर वर्ष 6 मई को भगवान की माता ईश्वरम्मा की स्मृति में ईश्वरम्मा दिवस मनाया जाता है।

“इन चारों में माता पहली और सर्वोपरि गुरु है।”
गतिविधियाँ
मुख्य गतिविधियाँ
हर विभाग में महिला समन्वयक
आध्यात्मिक, शिक्षा, सेवा और युवा विभागों में राज्य से समिति तक महिला समन्वयक कार्यक्रमों की योजना और अगुवाई करती हैं।
भजन और साधना
महिलाएँ भजन, नगर संकीर्तन और सामूहिक साधना में भाग लेती हैं और उनका संचालन करती हैं।
बाल विकास
महिलाएँ बाल विकास गुरु के रूप में हर सप्ताह बच्चों को मानवीय मूल्य सिखाती हैं।
मातृ-शिशु देखभाल
गर्भवती महिलाओं की देखभाल, पोषण सहायता और पालन-पोषण परामर्श।
ईश्वरम्मा दिवस, 6 मई
भगवान की माता ईश्वरम्मा की स्मृति में सेवा और प्रार्थना का दिन, जो माता के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है।
मध्य प्रदेश में 2026
2026 में महिला विभाग
1 जनवरी – 27 सितंबर 2026 की अवधि के सत्यापित आँकड़े।
- महिला सहभागिता (वरिष्ठ)
- 9,309
- युवती सहभागिता
- 2,619
- महिला बाल विकास गुरुओं की सहभागिता
- 397
- महिला समन्वयकसभी विभाग, सभी स्तर
- 701
गतिविधियों में बालिकाओं की भी भागीदारी रही: प्री-सेवादल बालिकाएँ 1,737 और बाल विकास बालिकाएँ 3,694। संगठन से बाहर की 1,032 महिलाओं की सहभागिता भी दर्ज हुई।
स्रोत: राज्य कार्यालय के अभिलेख, 27 सितंबर 2026 तक; 1 जनवरी – 27 सितंबर 2026 की स्वीकृत गतिविधि रिपोर्टें। ये सहभागिता के आँकड़े हैं, महिला सदस्यों की गिनती नहीं: हर गतिविधि में उपस्थिति जोड़ी गई है। पदाधिकारी केवल पद के अनुसार गिने गए हैं।
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संबंधित परियोजनाएँ और पृष्ठ
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