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श्री सत्य साई सेवा संगठनमध्य प्रदेश
पर्ती यात्रा में साई कुलवंत हॉल में मध्य प्रदेश के भक्त, जून 2026

श्री सत्य साई सेवा संगठन

संगठन परिचय

आध्यात्मिक आधार वाला एक सेवा संगठन, जहाँ सेवा ही साधना है — हर धर्म, जाति और वर्ग के लोगों के लिए खुला।

परिचय

श्री सत्य साई सेवा संगठन क्या है?

श्री सत्य साई सेवा संगठन, जिसकी स्थापना भगवान श्री सत्य साई बाबा ने 1960 के दशक में की, एक ऐसा सेवा संगठन है जिसका केंद्र और आधार आध्यात्मिक है। यह धर्म, जाति, पंथ या संप्रदाय का भेद किए बिना संपूर्ण मानवता के हित के लिए कार्य करता है।

मध्य प्रदेश में संगठन ज़िलों, समितियों और भजन मंडलियों के माध्यम से आध्यात्मिक, शिक्षा और सेवा — तीनों विभागों का कार्य करता है। हर समिति अपने क्षेत्र में साप्ताहिक भजन, बाल विकास कक्षाएँ और सेवा कार्य संचालित करती है।

हमारा मूल भाव

सेवा ही साधना है

संगठन अपने सदस्यों को एक मंच देता है, जहाँ वे सेवा और अन्य गतिविधियों को अपनी साधना (आध्यात्मिक अनुशासन) के रूप में करते हैं। इसकी प्रेरणा है आत्म-रूपांतरण — अपनी अंतर्निहित दिव्यता की अनुभूति। सेवा यहाँ उपकार नहीं, स्वयं को निर्मल करने का मार्ग है।

“सेवा सत्य साई संगठन की प्राण-वायु है। इस सत्य को स्मरण रखें कि आपका जन्म समाज की सेवा के लिए हुआ है।”

— भगवान श्री सत्य साई बाबा, 15 अक्टूबर 1999
रात्रि में आलोकित प्रशांति मंदिर, प्रशांति निलयम

“आपको यह दृढ़ विश्वास रखना चाहिए कि इस संगठन का लक्ष्य उन बाधाओं को हटाना है जो मनुष्य को ईश्वर से दूर रखती हैं, जो मानवत्व को माधवत्व से अलग करती हैं। मानव जैसा कुछ नहीं; सब कुछ दिव्य है। इस संगठन को मानव को दिव्यता तक उठाना है।”

— भगवान श्री सत्य साई बाबा, दिव्य प्रवचन, अखिल भारतीय सम्मेलन, प्रशांति निलयम, 21 नवंबर 1970
सर्व धर्म प्रतीक: केंद्रीय वृत्त के चारों ओर पाँच अर्धवृत्तों में विश्व के पाँच प्रमुख धर्मों के प्रतीक
सर्व धर्म प्रतीक

सर्व धर्म

धार्मिक या धर्मांतरण कराने वाला संगठन नहीं

यह संगठन किसी विशेष धर्म का प्रचार नहीं करता और किसी से कोई धर्म या कर्मकांड अपनाने को नहीं कहता। इसके विपरीत, हर व्यक्ति को अपनी ही आस्था का और बेहतर पालन करने की प्रेरणा दी जाती है — ताकि एक हिंदू बेहतर हिंदू, एक मुसलमान बेहतर मुसलमान, एक ईसाई बेहतर ईसाई बने।

इसीलिए संगठन का प्रतीक ‘सर्व धर्म प्रतीक’ कहलाता है। यह सभी धर्मों की एकता और आध्यात्मिक अनुभूति की ओर प्रगति का प्रतीक है। केंद्रीय वृत्त के चारों ओर बने पाँच अर्धवृत्तों में मानवता के पाँच प्रमुख धर्मों के प्रतीक अंकित हैं।

स्रोत: ssssoindia.org/about-organisation, ssssoindia.org/insignias

विशेषताएँ

क्या इसे अलग बनाता है

सदस्यता निःशुल्क और पूर्णतः स्वैच्छिक है। संगठन की हर विशेषता इसी सरलता से निकलती है।

  • स्वैच्छिक और आध्यात्मिक

    पूर्णतः स्वैच्छिक सेवा संगठन, जिसका केंद्र और आधार आध्यात्मिक है।

  • भेदभाव रहित समानता

    आस्था, जाति, रंग, पंथ या सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेद नहीं।

  • कोई शुल्क नहीं

    सदस्यता के लिए किसी भी नाम से कोई शुल्क, चंदा या प्रभार नहीं।

  • आत्म-रूपांतरण

    सदस्य बनने का एकमात्र उद्देश्य — आत्म-रूपांतरण द्वारा अपनी अंतर्निहित दिव्यता की अनुभूति।

  • सर्व धर्म एकता

    सभी धर्मों की समान मान्यता; हर सदस्य अपनी ही आस्था का बेहतर अनुयायी बने।

  • कट्टरता नहीं

    कोई नया पंथ या संप्रदाय नहीं — केवल ‘सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो’।

  • धन की याचना नहीं

    कोई धन-संग्रह या अपील नहीं; नियमित खर्च सदस्य स्वयं स्वेच्छा से वहन करते हैं।

  • जुड़ना चाहते हैं?

    सदस्यता की जानकारी →

स्थायी चार्टर

14 जनवरी 1981 का दिव्य चार्टर

भगवान श्री सत्य साई बाबा ने 14 जनवरी 1981 को तीसरे विश्व सम्मेलन में श्री सत्य साई सेवा संगठनों को स्थायी चार्टर प्रदान किया। संगठन आज भी इसी चार्टर और समय-समय पर लागू नियमों के अंतर्गत संचालित होता है।

चार्टर के अनुसार संगठन का सबसे मूलभूत उद्देश्य है — मनुष्य में उसकी अंतर्निहित दिव्यता के प्रति जागरूकता जगाना, और यह सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा के मूल सिद्धांतों को आचरण और उदाहरण द्वारा फैलाकर करना।

स्रोत: ssssoindia.org/our-charter

उद्भव

1960 के दशक से

संगठन के बीज 1960 के दशक में बोए गए — पहले भजन केंद्र और सेवा समितियाँ बनीं, फिर अखिल भारतीय सम्मेलनों के माध्यम से सेवादल, महिला विभाग और बाल विकास जुड़े। समय के साथ यह बीज एक विशाल वटवृक्ष बन गया, जिसकी शाखाएँ आज देश के लगभग हर ज़िले तक फैली हैं।

स्रोत: ssssoindia.org/genesis

संरचना

राष्ट्र से भजन मंडली तक

संगठन पाँच स्तरों में काम करता है। समिति और भजन मंडली इसकी प्राथमिक इकाइयाँ हैं, जहाँ सदस्य ‘सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो’ के सूत्र से बँधे रहते हैं।

  1. राष्ट्रीय

    अखिल भारतीय अध्यक्ष · प्रत्येक विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक

  2. राज्य — मध्य प्रदेश

    राज्य अध्यक्ष · प्रत्येक विभाग के राज्य समन्वयक

  3. ज़िला

    ज़िला अध्यक्ष · प्रत्येक विभाग के ज़िला समन्वयक

    30संगठनात्मक ज़िले

  4. समिति

    समिति संयोजक · प्रत्येक विभाग के समिति समन्वयक

    148समितियाँ

  5. भजन मंडली

    भजन मंडली प्रभारी

    218भजन मंडलियाँ

संरचना: ssssoindia.org/units-and-their-functioning। मध्य प्रदेश के आँकड़े: राज्य कार्यालय के अभिलेख, 27 सितंबर 2026 तक।

27 सितंबर 2026 तक

मध्य प्रदेश एक नज़र में

संगठनात्मक ज़िले
30
समितियाँ
148
भजन मंडलियाँ
218
स्वीकृत सदस्य
22,638
सेवादल
15,781

स्रोत: राज्य कार्यालय के अभिलेख, 27 सितंबर 2026 तक। सभी आँकड़े अभिलेख से; कोई अनुमान नहीं।

श्री सत्य साई सेवा संगठन मध्य प्रदेश पर्ती यात्रा का बैनर और भक्तगण, जून 2026

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